मेरी बेटी
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नाजुक, मासूम, नन्ही परी,
सीपी के मोती सी,
चाहती हूं छिपाकर रखूं आँचल में,
हर दुःख से दूर,
पर करूँगी परवरिश कुछ यूँ,
बनाऊँगी अभेद्य चट्टान सी,
नहीं बनना तुम्हें सजावटी फूल,
बिखेरना है खुशबू चहुँ ओर,
नहीं बनना कैदी स्वर्ण पिंजरे का,
उड़ना है उन्मुक्त आकाश में,
जीतना है जिंदगी का हर रण,
करना अवश्य हर कर्तव्य पूर्ण,
पर नहीं होने देना स्वशोषण,
पाना है सर्वोच्च लक्ष्य,
भरना अपने सपनों में इन्द्रधनुषी रंग,
अपनी कहानी की हर इबारत
लिखना अपनी मर्जी से,
और देना सुखद-सुंदर-सुखान्त,
चमकना पूर्णिमा के चांद सा,
कुछ यूं कि मेरा परिचय,
मेरी पहचान हो,मेरी बेटी।
#सजावटी