युग बीत चले, यूँ ही
तुम्हारे साथ चलते हुए।
अब तो स्मरण भी नहीं,
कब, कहाँ, क्यों और कैसे,
#आरम्भ हुई थी ये यात्रा?
ये हमारे प्रेम की यात्रा है।
इसका न #आरम्भ है,
न मध्य, और न ही अंत।
क्योंकि ये यात्रा ही तो
सम्पूर्ण सृष्टि की कारक है।।
#आरम्भ = #शुरुआत