जब मेरा दर्द हो जाता है बर्दाश्त से बाहर तो लगा देता हूँ दस-बीस स्टेटस,, हटा देता हूँ डीपी पर उससे कुछ होता नही है,। तब मुझे होता है अपने पागलपन का अहसास,,क्योंकि जो चीखें नही समझ पाया उससे क्या उम्मीद करूँ मेरी शायरी समझने की और मैं रोज यही सोच के सो जाता हूँ,,।