आत्म ध्वनि
तुम्हारे भाग्य खुल जाएंगे,बेटी
अगर कोई अच्छा सा,
लड़का पसंद कर गया।
तुम ऐशो- ऐश्वर्य की जीवन जियोगी, बेटी
अगर कोई अच्छा सा,
लड़का पसंद कर गया।
अरे....
आगे की पढ़ाई कर लेना ,
शादी के बाद भी,
क्योंकि ऐसा लड़का ना मिलेगा हमे,
फिर कभी।
करेंगे शादी धूम-धाम से तुम्हारी,
तो क्या हुआ!!!
कुछ ख्वाहिशें रह जाएंगी अधूरी तुम्हारी,
तुम बस...
लाज बनाएं रखना हमारी।
ना जाने कितने उम्मीदों तलेदबी है,
एक बेटी।
त्याग कर अपनी मुराद ,
भरती है सबकी अरमानो की पेटी।
जहाँ बीस पार हुआ,
वहीं शादी अनिवार्य हुआ।
अगर शादी से इंकार किया,
तो तुम्हारे इच्छओं पर वार हुआ।
कहने को तो बीसवी सदी है, साहब!!!!
पर न जाने....
कितनी संवेदनाओ का शिकार हुआ।
अरे! बेटी को बेटा,
बना कर तो देखो
उसके सपनो को पंख,
लगा कर तो देखो
एक बार उसे आसमान में,
उड़ा कर तो देखो
तुम्हारे लिए आसमां से,
वो तारे भी तोड़ लाएगी।
एक बार उसके हृदय में,
छिपी पीड़ा को तो देखो
तुम्हारे हृदय की रूह काँप जाएगी।