बेवकूफ बनाना उनको, भारी पड़ गया हमको
भोलापन आड़े आ गया, चालू समझे थे जिनको
बात बढ़ी, बढ़ती गई, पहुंची उनके घर तक
मज़ा बन गया अब सज़ा , ख़तम होगी ये कब तक
दिल पर लेकर बात मेरी, किया ये गड़बड़झाला
बिन सोचे - समझे मैंने, जाने ये क्या कर डाला
समझ अलग - अलग होती है, हर इंसान के अंदर
एक जैसा नहीं ये नाचे, ज्यों नाचे सर्कस का बंदर
पहली अप्रैल क्या अाई, भूली अप्रैलफूल बनाना
ये गलती न दुहराऊं, खुद का मज़ाक बन जाना
#बेवकूफ