जरूरतें बदलती हैं वक़्त के हिसाब से,
बचपन को दरकार है मां की गोद,
पिता के सुरक्षित स्नेह छाँव की
युवाओं को चाहिए मित्रों की संगत,
सपनों का विस्तृत खुला असमान,
हमें जरूरी है परिवार का सुरक्षित भविष्य,
वृद्धों की आवश्यकता है देखभाल,
अपनों का साथ,थोड़ा सा सम्मान,
भूखे की जरूरत है भरपेट भोजन,
मृत्यु को आसन्न तो बस एक चाह जीवन,
हम जरूरतमंद हैं आखिरी सांस तक।
#ज़रूरतमंद