एक स्त्री जब खामोश होती है,
तो वो चाहती है तुम बिन कहे,
ही समझ लो उसके मन में,
चलने वाला अन्तर्द्वन्द...
उसके सपने, उसका दुख,
उसकी हर परेशानी,
उसकी हर वो इच्छा,
जो वो पूरा करना चाहती है..
लेकिन कह नहीं पाती है,
बस सुनना चाहती है,
‘मैं तुम्हारे साथ हमेशा खड़ा हूँ’..
इतना सा बस..
लेकिन जब तुम न समझ पाते हो,
उन अनकही बातों को...
न देख पाओ उन,
खामोश रातों को,
न देख पाओ तुम्हारे,
रूखे बर्ताब से आये,
आँखों में छिपे आँसुओं को,
तो वो अपने लिए खामोशी,
चुनती है..
लड़की को यूं खामोश होने में..
दिन या महीने नहीं लगते,
उससे सालों के व्यवहार,
से वो ये खामोशी चुनती है..
एक स्त्री जब खामोश होती है..