जीवन है एक खुला रहस्य..!!
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पेड़ों के पत्ते-पत्ते पर लिखा है,
जीवन का "वेद"
सागर की हर लहरों पर लिखी हैं
आती-जाती साँसों की "ऋचाएं"
सूरज की प्रत्येक किरणों से
उतरती हैं,जीवन के उत्सव की "आयतें"
देखो तो..!!
कितनी मधुर हैं
झरनों से झरती मीठी "गुरुवाणी"
चंचल हवाओं की शीतल सरसराहट
गा उठती हैं
हजार रागिनियों संग
अंतस्तल की सुगंध को
सच...!!
जीवन है एक खुला-रहस्य
कुछ भी बंद नहीं,
अतीत और भविष्य के बाइस्कोप में
झलक दुःख की
वर्तमान का विशाल पर्दा
उद्दघाटित करता इसी क्षण सब कुछ..,
जीवन कंजूस कहां..??
सब कुछ है देने को तैयार
बे-शर्त...!
लेकिन तैयार हम नहीं..........!!!!
#करुनेश कंचन