बे-नाम है सख्सियत दिल, गुमनाम है
पहेचान, फकत अलफाज तो नही है
रुहे मस्त जिंददिली ,क्या पुकार लेती
आप रुहाना नूर, सब मालामाल नही है
तुटती रहेती डोर ,सजाने लगे है सब
जुडना जरुरत जिंदगी कमाल नही है?
हसीन लम्हा खो देते नादानियत में ही
हुश्न का हाल ,कोई खबरदार नही है
छुटती रही साहिल से कस्ती ,मजधार में
टुटते रहे जुडते रहे , अहेसास ही नही है