हित
***
जैसे जिंदगी का असल लुत्फ वही उठा सकता है जो चार जन क्या कहेंगे कि सोच से ऊपर उठ जाता है। उसे बस अपनी खुशी से मतलब रहता है किसी दूसरे से नही और होना भी चाहिए कारण आपके जिंदगी जीने के तरीके पर सवाल खड़ा करने वाले आपके कठिन वक़्त में आस पास भी खड़े नही दिखाई देते। जो वक़्त पर साथ नही दे, उसे हम टोकने का अधिकार भी क्यों दें?। वैसे भी ये उंगली उठाने वाले चार जन सदैव पीठ पीछे ही हाय हाय करते हैं सामने आकर सवाल पूछने की हिम्मत उनमें भी नही होती।
ठीक ऐसे ही देश के विषय मे वही प्रधानमंत्री सटीक और सीधे निर्णय ले पाता है जो बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक को खुश रखने या नाराज रहने की सोच से ऊपर उठ जाता है।
हमें तो बस अब इंतज़ार है तीन कठोर फैसलों का,
1 जनसंख्या नियंत्रण कानून
2 आरक्षण को जड़ से खत्म करना
3 समान नागरिक संहिता
जिस समय ये तीन कानून लागू होंगे,देश का जो भी प्रधानमंत्री हो, किसी भी पार्टी से हो, उन्हें दिल से सलाम रहेगा।
देशहित के सामने जो प्रधानमंत्री स्वयं, परिवार और पार्टी से ऊपर उठकर सोचेगा, वही ये फैसले ले पायेगा।
विनय...दिल से बस यूँ ही