मेरे अल्फाज
अगर इश्क हादसा है, तो इससे गुजरने दो
दो दिलों को इसमे घायल होने दो
अधूरा है चाँद,अधूरी है रातें
अधूरे हैं हम,या अधूरी है हमारी चाहतें
यूँ ही नहीं मिलती मंजिल किसी को
बहुत कुछ खोना पड़ता है
एक बसंत को पाने के लिए
पतझड़ को भी सहना पड़ता है
तेरी चाहत पर अगर शायरी लिखू
तो यह दिल शायर ना बन जाए
तेरी नशीली आखों को अगर देखू
तो यह नशे में ना डूब जाए
मत देख इतना आईना की कही
यह भी तेरा आशिक ना बन जाए
चलना है चलना है चलते ही जाना है
ना रुकना है ना झुकना है, बस
मंजिल को पाना है
:कुमार किशन कीर्ति