रखना ये शब्द नहीं जिम्मेदारी है,
जो कभी तुमने किसी पर तो किसी ने तुम पर डाली है।
जब कहा होगा किसी ने कि अपना ख़याल रखना,अपने प्रेम का इज़हार किया होगा।
जब कहा होगा किसी ने की याद रखना,तो ताकीद किया होगा।
जब कहा होगा ध्यान रखना,तो परवाह जताई होगी,
और जब कहा होगा एतबार रखना,तो तेरा हूँ और तेरा ही रहूंगा का विश्वास जताया होगा।
ये शब्द जरूर है छोटा सा और लगता व्यर्थ है।
पर जब जुड़ता है भिन्न भिन्न शब्दों से तो देता अनेक अर्थ है।
#रखना