पहेली बार कहीं मिल गया तेरे से ,
सांस थम सी गई थी ऐसा कुछ अंदाज मिला,
तेरे से मिलन पर जीने का अंदाज़ मिला,
कहीं जिक्र न आए तेरे अलावा दूजे का नाम,
ऐसा माहौल बनाने का अंदाज मिला,
कभी बात पर बात करते रहो निकली ,
ऐसी कई रातें में उजाले बने ऐसा अंदाज मिला,
कहीं मिल ना मिल सके मिलते मिलते ,
और दूरियां को नाप में का अंदाज मिला,
वो रोज जुठी कस्म खाई हुवे है,
उसको सच में निभाने का अंदाज मिला,
प्यार करते हो इस तरह जताना ,
और इसे कहीं प्यार में छुपा दर्द को अनुकरण करने का अंदाज मिला,
अब थक तो गया हूं जलते जलते
कहीं दुनिया को जलादू ऐसा अंदाज मिला।
❣️PYAR KA EK AHESHASH ❣️