पूरे विश्वास और अभिमान से कह रही हूँ, ये जो चोपड़ा जी द्वारा निर्मित "विष्णु पुराण" धारावाहिक में, सूत्रधार धरती का Narration है हम उससे कहीं अच्छा कर सकते हैं। गुरुता, दया, क्षमा और जीवनाधार धरती के संवादों का वाचन इतना माधुर्य हीन है कि कानों में हथौड़े की तरह बजता है। पौराणिक कथाएं जब तक कलाकार की आत्मा को न छूती हों वो उनमें रस नहीं भर सकता।
हे स्वयं साक्षात नारायण, पद्मनाभ इस अहंकार पूर्ण कथन के लिए क्षमा करना किंतु वाचक कलाकार के रूप में अनुभूति ऐसी ही हुई। 🙏🙏🙏