#सुना हुआ
#Heard
एक आवाज आ रही थी, सिसकती कोने से
कोई दर्द सह रही थी, हिचकती कोने से
अंधेरा चढ़ा, रात कली हुई थी
आज आबरू, जैसे खाली हुई थी
मै ठहरा जहां, वो किराये का घर था
थी पहली निशा, मै कुछ बे- खबर था
जो जा कर के देखा, दरिंदे खड़े थे
घिरी एक अबला, तीन बन्दे खड़े थे
थे हवस के पुजारी, वो हवस बेचते थे
जो इज्जत बचाए, वो कवच बेचते थे
मै झटपट से दौड़ा, पगों को सम्हाले
लिया नाम प्रभु का, किसी को बचाले
मै मारा एक पत्थर, का छोटा सा टुकड़ा
किया रोशनी और, दिखा एक मुखड़ा
वो झटपट से आकर, मुझे घेर डाले
अबला मिली थी, वो थे गिरोह वाले
मै सब कुछ लुटा कर, गंवा कर खड़ा था
कलयुग कहर आज, मानवता पर पड़ा था
फिर भी मै बनकर, चला हूं सहायक
इस कहानी का मै ही, अकेला हूं नायक
करो उसकी रक्षा, जो तुमको पुकारे।
कहे ज्योति इच्छा, अब रब सब संवारे।।
।। ज्योति प्रकाश राय ।।