कौन कमबख़्त कहता है
हम कसरत नहि करते?
💪 💪 💪 💪💪
हम समापन (कनक्लुझन) पर छलाँग लगाते है,
हम सभी पर दबाव रखते है,
हम सत्य को मरोड़ सकते है,
हम क़ानून को बदल सकते है,
हम अपना प्रारब्ध को घुमा सकते है,
हम अपना ‘अहम’ को उठा सकते है
हम कठीनाइओ से भाग सकते है। 😆