बन जा इन्सान
अरे ओ हैवान, मिलता है क्या तुझे यह पापभरे कृत्य से,
दुख होता है हमे यह विरो, शहीदों के कफन देखने से
तुने तो बेच दिया तेरा आंतकरण, जमीर, तेरी आत्मा ।
क्या देगा जवाब जब पुछेगा तुझे अल्लाह या परमात्मा?
संभल जा अभी भी, बंध कर यह आतंग, यह बरबादी ;
सड़ेगा नर्क में तू , मचाई है तुने इस धरती उपर, बहुत तबाही ।
Armin Dutia Motashaw