चलो चलें बाहर देखें
सूरज अपने घर बैठा है,
धूप खिली है,क्षितिज उठे हैं
धरती ने सब नाम लिखे हैं।
चलो चलें गगन में देखें
ध्रुव तारा अपने घर पर है,
सप्तर्षि उसके निकट बने हैं
चलो चलें उन्हें मिलकर देखें।
भाव वृक्षों के पढ़ कर आवें
विहग उड़ा कर नभ को देखें,
खेत-खलिहान पर होकर आवें
चलो राह पर मिल कर आवें।
अपनी बात बताकर आयें
नयी दिशा के गुण हम गायें,
घर-घर अपने खेल दिखा कर
पढ़ने-लिखने का समय बता दें।
(*बच्चों की)
*महेश रौतेला