उछलती कुदती एक लहर आयी।
किनारे रुक़कर दो पल मुस्कुरायी।
कहाँ उसने, "मैं फ़ुली न समायी।
देखो सज़न गगन में काली घटा छायी।
आनंद हुआ है यू किनारे देखकर।
यकीन कर , मैं गयी हूँ, पर आऊँँगी लौटकर
तू सब्र कर, थोड़ा इंतजार कर
मोहब्बत की है दिलसे, तो भरोसा कर।
बात मैंने उसकी समझ ली।
कलीयुग मैं भी वफ़ाइ मान ली।
अब रोज़ इंतजार करता हूँ।
मैं उसके रुकने का इंतजार
करता हूँ।
#आनंद