©नियति-2
मेरी नियति का ...
मजाक ना बना
ए ..जिंदगी....
जहाँ खड़ा हूँ..
वहाँ.....
खड़े रहने के लिए...
न जाने कितने
गम पीएँ हैं..
कष्ट सहे हैं .....?
बस, तू तेरा काम..
कुछ ऐसे सलीके से कर..
कि ..मेरा काम भी...
हो जाए.....और
तेरा नाम भी.....।
सस्नेह प्रस्तुति...
©अमित दवे,खड़गदा
#नियति