तेरे संग ये जिंदगी
तेरे पहलू के तपिश ए इंतजार में..
लम्हा ए ख्याल गुज़रता रहा
साल दर साल खिसकता रहा
कुछ दर्द सिसकते रहे
इंतजार महकते रहे..
वो गुजरे लम्हों के अहसास
तुझे बांध तो सके नहीं..
पर शब्द मेरे ढलते रहे और दर्द पिघलते रहे
मेरी तपिश ए कशिश में
तू आज भी है बंधा हुआ
मेरे भाव ए शब्द की ये परिधि
जिसमें तू आज भी जकड़ा हुआ
निकल पड़े हम प्रेम के अनंत पथ पर
मेरे भावों के आगोश तले..
तू आज भी सिमटा हुआ..
मेरी सोच के आवरण तले
हाँ, तू आज भी है लिपटा हुआ
अब देखो न, इस याद पगी रचना संग
तू आज भी "मीनाक्षी" संग जिंदगी जीता हुआ..