कौन जानता है
आदमी की फ़ितरत
उसके दिमाग में
पनपते विचारों की बनावट
और उनका मक़सद
कई बार खुद मनुज को भी
नहीं होता इल्म
इस बात का कि
उसके भीतर पनपते ख़्याल
उसे किस डगर लेे जाएंगे
बस मनुज तो एक गुलाम सा
बढ़ता रहता है और
करता रहता है वो सब
जो कि उसका मालिक -
उसका फ़ितूरी दिमाग
उसे आदेश देता रहता है
बांधे, जकड़े हुए
उसके ज़मीर को पाश में अपने
:- भुवन पांडे
#बनावट