कहानी
*" कामकाजी और फालतीकामकाजी औरत "*
शक्कु : "तेरे को मालुम क्या माया को फेमस ब्रान्डेड कपडे की दुकान कहां मालूमीज नहीं और फेमस रेस्टोरेंट का भी मालुमी ज नहीं | अरे ! उसे तो फेशन-बेशन क्या वो भी जानतीज नहीं | वो कैसी औरत है | बस पुरा दिन कुछ न कुछ करना | वो ज्यादा लोगो से बातीज नहीं करती | खमंडी कहीं की |"
चंदा : "ऐ ऐसा नहीं बोलने का उसको भले ललन टोप क्या मालुम नहीं | पर वो अच्छे से जीवन कैसे जीए सब जानती | वो भले ज्यादा बोलती नहीं पर उसका दिमाग बहोत तेज चलता हमारी जुबान तेज चलें और उसका दिमाग 😂 | पर क्या दिमाग चलाती है हां ! कुछ न कुछ सीखें तो चले भी और हम क्या सीखते कुछ भी नहीं बस इधर की उधर करते और मजे लुटते | वो दिमाग चलाके भला भी तो करती | दो लोगों के काम तो आती और अपुन साला एक दुसरे से जले बुरा सोचे कीसी ओर को खुश देखीज नहीं पाते | माया कितनी अच्छी है तभी तो उनसे जलते नहीं बुरा नहीं चाहते | काश हम भी उसी की तरह....... पर ये जबान साली मीठा बोलीज नहीं पाती | कीतने आलसी है अपुन ना कि बस पुरा दिन यहां की वहां में वक्त गवाते | कुछ अच्छा सीखें तो हम भी माया की तरह खुश रेह सके | हम तो साला अपुन का भी भला नहीं सोच पाते | चल अभी रखती है तो जासती शाण पटी ना दीखाने का माया को वरना ऐसा कुछ करेगी अपुन की बोलती बंद हो जाएगी |"
शक्कु : "इसीलिएज तो उसको सीधे बोलीज नहीं पाते बाकी सब को तो कैसे मुंह पे बोल देते | तु सहीज बोली वो अच्छी है भला सोचती इसलिए उसको ऊपरवाला मदद करता और हम भी नफरत नहीं कर पाते | चल अभी रखती है | शाम को बात करते |"....ॐD