चिड़िया फुदकती है, ढूंढ़ती है
यह जानने को
कि कहां है दाना पानी
उसे नहीं जानना कि ...
आकाश क्यों नीला है
पानी क्यों गीला है
बारिश कैसे होती है
रात क्यों होती है
आदमी कहां से इतने रंगीन पंख लगाता है
आदमी कैसे इतना सारा दाना उगाता है
नहीं है वो जिज्ञासु हमारी तरह
वो तो बस जानती है कि नीला आकाश
उसकी आज़ादी, उसकी उड़ान की पहचान है
और उस बारिश में उसकी क्रीड़ा की बूंदें हैं
और सांझ को रात की दस्तक मिलते ही
उसे पर बांध कर नीड़ में सो जाना है
उसके लिए आदमी रंग बिरंगे पंखों वाला
बड़ा सा ना उड़ पाने वाला भागने दौड़ने
वाला जानवर है और जिसके
ऊपर से, आसपास से फुर्र कर उड़ जाना
उसे बड़ा अच्छा लगता है
पर...
हम इंसान इतनी सारी
जिज्ञासाओं का, जानने का भारी बोझ
लादे अपने मानस पटल पर
अब मस्ती में फुदकना, ' उड़ना' भी
भूल गए हैं ...
#जिज्ञासु