किसी को यह कहना की इस रूम में अकेले रहता हूॅ। रूम के साथ हिंसा होेगी। जब कोई कहता है, तुम अकेले रहते हो? मुझे जवाब में दूर भाग जाने की इच्छा होने लगती है। उस जगह चला जाऊ जहां यह सवाल मुझ तक ना पहुंचे। अकेले रहने के बावजूद मैं कभी नहीं कह सकता की अकेले रहता हूं। एक दिन इस सवाल से तेजी से भाग रहा था अचानक गिर पड़ा और कह डाला मैं अकेले रहता हूँ। मुझे लगा मैंने किसी संबंध को छिपाने की कोशिश की है, वह जो लंबे समय से मेरे साथ है। अंदर एक पीड़ा बढ़ने लगी थी। क्योकि यह झुट रूम के भीतर कहां था, एक अजीब सी बैचेनी खाए जा रही थी कोई कह रहा था तुमने सच कहां क्यों नहीं? तभी खिड़की खोल दी मानों उसे गले लगा लिया हो. इस गलती के माफ़ी पर. शाम के वक्त लाइट चालु करने से डरता हूॅ। शायद लाइट जलने पर धूप की रोशनी को लगेगा मैंने उसे जाने को कह रहा हूॅ। शाम की रोशनी को कभी खत्म करना नहीं चाहता जो मेरे साथ सुबह से साथ रहती है। दफ्तर जाने से पहले कमरे की तस्वीर लेना नहीं भुलता। यह एक तरह का प्यार है। रूम की चौखट से उन्हें अलविदा कहता हूं। फिर बची हुए थोडी सी जगह से रूम के भीतर को झाकता हूॅ। धूप की रोशनी किसी के ना होने की वियोग में धीरे-धीरे कम हो रही होती है। जब कभी शाम को रूम से निकलने के बाद फिर थोड़ी देर बाद रूम वापिस पहुंच जाउ तो लगता है शायद शाम मुझसे यही चाहती थी. और रूम में एक तरह का उत्सव मनने लगता है, जिसमें मैं कतई अकेला नहीं होता। हर शाम एक उत्सव है मेरे लिए. पर जब रात को रूम आता हूं एक अकेलापन रूम में मुझे समेट लेता है जैसे गाँव में मेला उत्सव मनाने के बाद सुबह उसके अवशेष बचे होते यह बताते के लिए की मेला का उत्सव शानदार था..मै रूम की दीवारों को चूमता हुआ लाइट जलाता हूं खैर ♥️🌸