हालांकि एक माँ का स्थान कोई दूसरी स्त्री नहीं ले सकती, पर अक्सर एक बहन,भाभी, दोस्त, पत्नी या फिर प्रेमिका... माँ का किरदार ही निभाती हैं, एक टूटे मर्द को संभालने में और उसे वापस वही इंसान बनाने में।
स्त्री किसी मर्द की चाहत और आदत हो या ना हो, जरूरत निश्चित होती हैं। एक जिद्दी मर्द चाहे कितने भी गुस्से में हो अगर स्त्री चाह लें तो बेशक उसे संभाल सकती है...!