मैंने अब हंसना सीखा, जो भूल गई थी; क्या होता है, कुछ समय तक थम सी गई थी मैं,
बहुत सी चीजें हमें उलझा देती है, पर अब उलझनों से सुलझना सीखा,
लगता है कभी कभी क्यों आया वो समय मेरी ज़िन्दगी में, पर अब सवाल से ज्यादा जवाब ढूंढ़ना सीखा,
जवाब मिला मुझे, की परेशानियां हमारे सब्र का इम्तिहान लेती है, पास होंगे या फेल फिर ये परिणाम देती है,
कशमकश से भरी हुई होती है हर किसी की ज़िन्दगी, फिर भी ऐसे कशमकश में ही खुश रहना सीखा,
मेहमान तो हर कोई है इस दुनिया में, इसलिए ज्यादा फिक्र को हवा में उड़ाना सीखा,
कम नहीं है हम किसी से, यही बार बार खुद को समझाते हैं और खुद को खास समझना सीखा,
जिंदगी बार बार नहीं मिलती शायद, इसलिए खुश रहने का कोई ना कोई बहाना सीखा,
बस मैंने अब हंसना सीखा।