जब रिश्तो में लोग चाल चलने लगते हैं तो भावनाएं कभी-कभी शून्य हो जाती है हम चाहते तो है भावनाओं का घोड़ा करना लेकिन वह भाग में परिवर्तित हो जाता है जब जोड़ते हैं तो वह घटनी शुरू हो जाता है इसलिए हमें दर्पण के सामने खड़े होकर झूठ नहीं बोलना चाहिए दिल्ली दर्पण पर जो चेहरा है वह स्वयं आपका है ठीक ऐसे ही जो रिश्ते होते हैं वह एक दर्पण के समान होते हैं व्यक्ति को रति मात्र भी उसमें छल नहीं करना चाहिए नहीं तो जीवन पर्यंत आप स्वयं से आंख नहीं मिला सकेंगे
#शून्य