कीसी को लूटना जो आवे,
तो मानवी कहावे!
दिलों से खेलना जो आवे,
तो मानवी कहावे!
मुखोटे पहनना जो आवे,
तो मानवी कहावे!
सब कुछ पैसों से तोलना जो आवे,
तो मानवी कहावे!
अपनों से मुंह मोड़ना जो आवे,
तो मानवी कहावे!
कान्हा तेरा कलियुग भी कमाल है! "व्रजकण"
जो इ सब कर न पावे,
बस प्यार ही लूटावे,
ना जाने क्यों?
वही, बेचारा जंगली कहावे!
#जंगली