स्वार्थ के मद मे चुर होके
की जो तुने गलती है
कलियुग का इन्सान है तू
फितरत तेरी जंगली है
एक दूजे को मार के जायेगा तू जन्नत को
यही सोच तेरी नकली है
कलियुग का इन्सान है तू
फितरत तेरी जंगली है
जिसको ढूंढ रहा तू जग में सत्य छूपा जो भितर में
बस यही बात एक असली है
कलियुग का इन्सान है तू
फितरत तेरी जंगली है
जग को कर लेगा मुठ्ठी मैं चहरे पे चहरा धर के
वो ख्वाब तेरा दोशक्ली है
कलियुग का इन्सान है तू
फितरत तेरी जंगली है
#જંગલી