मिले चले है!
बड़ी मुद्दतो बाद तो रुबरु हो चले है।
भीड़ कट गई तो खुदसे मिले चले है।।
पहोंचे कहिं नहीं पर दूर निकल चले है।
रास्ते बंध ही सही,उम्रसे मिले चले है।।
रोक लिया तो,पांबंदीयोके साथ चले है।
वक्ती रेतसे फिसलते हुए मिले चले है।।
वैसे बुरा नहीं शख्स,जिनसे मिले चले है।
थोड़ा हाथ थाम लुं,जिद्दसे मिले चले है ।।
जरूरतों ने इतना भगाया उतना चले है।
तो भी खाली हाथ अनजाने मिले चले है।।
खो न देना,अगर जो स्वयंके पास चले है।
उम्मीदोके पार यही है,जीसे मिले चले है।।
बड़ा मासूम था 'देवांग' कहां लिए चले है?
मोहरोंको चिर,खुद से रुबरु मिले चले है ।।