वो किसी और की तलाश में है,
बदल कर वेश मानो किसी लाश में है,
कल तक मेरा होने का दावा करता था
फरेबी वो जैसे कहीं आसपास ही है,
खुदा बना कर एहसान किया था जैसे
वो तो शायद लेता रिश्ते मज़ाक में है,
मैंने जिसे अक्सर माना था परछाई
खंजर जैसे आज उसी के हाथ में है
#Azad