#kaavyotsav -२बदला ताना बाना
देखो ! वक़्त का बदला मिजाज ,
न रहा कल और न ही रहेगा आज।
संकट की इस विकराल बेला में
बदला समाज बदली सोच
बदला ताना बाना है,
सोशल डिस्टनसिंग के इस दौर में
जनसमूह
अब लगता गुजरा जमाना है।
चहुं ओर एक अजब सी शांति छाई है ,
प्रकृति भी मानो एक नवरूप लेकर आई है।
जीव -जंतु भी अब निर्भीक लगने लगे हैं,
पक्षियों का कलरव भी अब देता सुनाई है।
चूंकि धरा प्रभु ने उनके लिए भी बनाई है।
अनियंत्रित प्रदषूण भी घटने लगा है,
जब से मनुष्य घर से निकलने में सोचने लगा है।
भागदौड़ भरा जीवन रुक सा गया है,
अततव्यस्तता का चक्र भी तो थम सा गया है। परिवार शून्य होते जीवन में
नव -चेतना आयी है।
अपनों के लिए अपनों के पास
की संकल्पना उभर कर आई है।
सोशल डिस्टनसिंग के दौर में
भावात्मक एकता को बढाना है।
स्व हित छोड़ राष्ट्रहित सर्वोपरि बनाना है।
स्व- अनुशासन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है ,
यही वरतमान उत्कृष्ट पूंजी है।
बदला समाज ,बदली सोच
बदला ताना बाना है,
वैश्विक महामारी के चंगुल से
राष्ट्र को बचाना है,
राष्ट्र को बचाना है।
पूजा शर्मा