My Painful Poem...!!!!
माना मौत का मातम है छाया
पर हौसले जवाँ-मर्द कम नहीं
तपती रेगिस्तान-सी है धूप तो
पर हर चौराहे पुलिस कम नहीं
आपको मौत के मुँह से है बचाने
खड़े पाँव दाकतर नसँ कम नहीं
देश का हर महकमा ओन-ड्यूटी
लोक-डाउन में भी सेवा कम नहीं
प्रधानमंत्री ख़ुद भी 24X7 फ़ोन
पर उपलब्ध,चिन्ता उन्हें कम नहीं
पागल बंदे कुछ अककल के अँधे
जूठ बोल निकलते,बुद्ध कम नहीं
और भी बद-गुमान करते हैं वार
सेवाकर्मीयो पर हैवान कम नहीं
विविधता में एकता का है परिपूर्ण
देश हमारा पर पागल कुछ कम नहीं
प्रभु सदबुद्धि दे नराधमों को वरना
उसकी लाठी में आवाज़ तो है नहीं
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