तूफ़ानी लहरें हों
अम्बर के पहरे हों,
पुरवा के दामन पर दाग़ बहुत गहरे हों
सागर के माँझी मत मन को तू हारना..
राजवंश रूठे तो
राजमुकुट टूटे तो,
सीतापति-राघव से राजमहल छूटे तो
आशा मत हार, पार सागर के एक बार
पत्थर में प्राण फूँक, सेतु फिर बनाना है
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है!
#आजाद