सुदंर गजल ..
काफिया .आ ।
रदीफ .न कर ।
चाँद तू इस तरह ,मुस्कराया न कर ।
धरती पर आ ,मुझे तड़पाया न कर ।।
तेरी शीतल ,चांदनी दिखाया न कर ।
दिल की गर्मी ,फिर बढ़ाया न कर ।।
तू अपना सुदंर ,मुखडा दिखाया न कर ।
दिखा कर उसे ,अब छुपाया न कर ।।
तू सुदंर सी ,अंखियाँ लुभाया न कर ।
लुभाकर अंखियों ,को रुलाया न कर ।।
तू गमों को यूँ ,बढाया भी न कर ।
अंखियों में सजा कर ,सताया न कर ।।
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