"शुभ संध्या"
फज़लू ट्रेन में सफ़र कर रहा था। टिकट कलेक्टर ने फज़लू से टिकट मांगी, फज़लू ने जेब देखी, बिस्तर खोला,सुटकेस खोला,सारी चीजें फैला दी , मगर टिकट न मिली। टिकट कलेक्टर भी चिंतित हो गया । उसने फज़लू से कहा: देखिए आप , भले आदमी मालुम होते हैं। जरुर होगी टिकट , चिंता मत करो।
फज़लू ने कहा कि ऐसी की तैसी टिकट की। तुम्हारे लिए कौन टिकट ख़ोज रहा है ।
टिकट कलेक्टर ने कहा : फिर तुम किसके लिए खोज रहें हों ?
फज़लू ने कहा : मैं इसलिए ख़ोज रहा हूं कि मुझे जाना कहा है !