दिल के टुकडे
'गर तु कहे भूल जा, तो क्या यह हो पायेगा हमसे ?
कैसे छूटेगा यह प्यार, यह प्रेमभरा नाता तुमसे ?
तो क्या हुआ, गर तुम नही हो हमारे ;
दिल टुट गया तो क्या; यह टुकडे भी है तुम्हारे !
कभी शिकायत की नही, और ना हम करेंगे;
बस चुपचाप यूही तुम्हारी याद मे जिएंगे और मरेंगे ।
शीशा जब टुट जाता है तो दिखते हैं एक के अनेक;
बस वैसेही, यह टुटे दिल के टुकड़ोमे तु है; हर टुकडे में एक ।
'
दिल मे जो बसे हुए है, उनका अस्तित्व मिटता नही कभी भी
दिल के हर टुकडे में बसे हुए हो तुम अभी भी ।।।
Armin Dutia Motashaw