रिस्तो का कारखाना अब मोबाइल में ही डाल दिया,
जब बच्चों ने की भूल कोई wtsap में ही डांट दिया।
अब घर घर जा के मिलने की फुर्सत किसके भाग्यमे,
चाहें जो भी काम किया सब सोशयलिस्ट में बाँट दिया।
बच्चे बूढ़े चाहे जवान,हो गई जो यदि बीमार,
ऑनलाइन तैयारी की फिर जो मिला वो खाट दिया।
रिश्ते गहरे बना दिए हे बैठे बैठे मोबाईल पर ही,
भूल हुई तो बाबू सोना को चित्रपट से ही मार दिया।
कैसे कैसे लोग यहाँ पर अजीब तरह के रास्ते हे,
पहोच गए जो मंजिल उनको अंतमे नक्शा बाँट दिया।
हे मानव अब सोजा तू मस्तिक्ष तेरा खिलौना हे,
नाच नचाने को मशीन, खुद तूने ही घर और घाट दिया।
Dp,"प्रतिक"