बुलाती हे आफत,पर जाने का नही,
बहकावे में किसी के आने का नही।
ये दौर हे मस्ती का रिस्तोके नाम पर,
टूटे तो टूट जाये डोर सुलजाने का नही।
एक आप नही अपनों में और कई है,
रूठे तो मनाओ भाव खाने का नही।
यार दोस्त मिलते हे किस्मत से यहाँ,
मिल जाये तो फिर आजमाने का नही।
दर्द ग़म तकलीफ सब पहलेकी बात थी,
आज के दौर आये आँसु बतलाने का नही।
अपनों के बिच मुस्कुराके जिओ दोस्त,
ग़म भरी जिन्दगीमे उलजाने का नही।
dp,"प्रतिक"