मै कोई राजनीतिग्ञ नही हूँ न ही किसी खास पार्टी का
समर्थन करती हूँ ,और न ही समाज सेविका हूँ . न मै कोई
अर्थशाष्त्री और न ही वाणिज्य का विशेष ग्यान रखती हूँ
मै आम भारतीय हूँ , क्योकि आम के साथ मैने भारतीय
लगाया है यह भावना यहीं से उत्पन्न हो रही है किन्तु
भावना पर शब्दो का अधिक बोझ न देकर संक्षिप्त रूप
मे ही इसे प्रदर्शित करूंगी . आज देश की जो महामारी
की स्थिति दिखाई दे रही है वह किसी से छुपी नही
है .किसी न किसी प्रकार से हम इससे निपट ही लेंगे ऐसी
मेरी आशा है. क्या हम इस पर विचार कर रहें है कि
इसके बाद हमारी अर्थव्यस्था कहाँ जायेगी. क्या केवल
एक व्यक्ति पर ही सारी जिम्मेदारी है . क्या हम सब एक
छोटा सा प्रयास नही कर सकते इस निष्क्रियता से उबरने
का. जो पैसा हमारे देश से अन्य देश जा है वह हमारे ही
लिए हथियार मे परिवर्तित हो रहा है भले ही यह प्रत्यक्ष रूप से
हम सबको न दिखे. लेकिन जानते सभी बुद्धिजीवी हैं. देश
हित के कुछ पक्ष और वैश्विक,विदेशी कूटनीति के कारण
सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है . किन्तु हमे कैसी
मुश्किल हम विदेशी समान क्यों खरीदें . वह हमे लुभाने के
लिए दस की वस्तु पाँच मे दे रहें है .हम कम गुणवक्ता और
हानिकारक होते हुए भी उनके जाल मे फसते जा रहें हैं .
बात यहीं नही खत्म, वह हमसे कमाकर हमे ही नीचा
दिखा रहे है . हमे निजी स्वार्थो से ऊपर उठकर थोड़ा सा
तो प्रयास करना होगा . आईये हम सभी एक संकल्प ले
हम विदेशी वस्तुए नही खरीदेंगे और निष्क्रिय हो रही
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने मे अपना योगदान देंगे.
क्योकि भारत हमारा घर है और घर की जिम्मेदारी प्रत्येक
भारतीय की है. वन्दे मातरम्,
#निष्क्रिय