तुम्हे मालूम था न कि मैं तुमसे कभी ऊंची आवाज में नही बात करूंगा , फिर भी तुमने मुझे मजबूर किया ऊंची बात करने पर , जब जाना था तो बोल देती , ये छुप कर किसी से नए रिश्ते बनाना पूछने पर झूठ बोलना और झूठ पकड़े जाने पर एक और झूठ बोलना , ये सब्र का बांध टूटने जैसा नही है तो क्या है !
सच कहूँ तो शायद मुझे परवाह नही खुद की , मेरे सामने मेरा पूरा करियर पड़ा है , मेरे माँ बाप मुझे किसी चीज़ की कमी नही होने देते , हर सम्भव मदद करते हैं ,फिर भी मैं उनके सामने खरा नही उतर पाता , हे मालिक मुझमे इतनी तो हिम्मत दे कि मैं खुद के नज़रों में एक मेहनती एवम सफल बन पाउँ