"ऐ खुदा तू रहा तो पक्ष मे ही सदा पर ,हमेशा मूक बनकर केवल देता रहा लड़ने का हौसला, दिला तो सही जीत भी कभी ! या हमेशा हार जाना ही मेरे लिए सही ये ,तू बख़ूबी जानता है मेरे अतःकरण को तू ,पहचानता ,तेरी देनदारी से क्या ख़िलाफत मेरी ,तेरी हर ख़्वाहिश मे रज़ा मेरी"
#पक्ष