लॉक डाउन, देश बन्द, शहर बंद, मंदिर बंद ,मस्जिद बंद, ठेले बंद मेले बन्द, हमने घर को कैद किया हुआ है और घर ने हमें। इस कैद के दरमियान, खुद से नाश्ता, लंच, डिन्नर, चाय और घर के सारे काम करने के बाद एक बात समझ आयी कि घर का काम सिखाने में लड़के लड़की का भेद मत कीजिये
किसी भी क्षेत्र में किसी का एकाधिकार नहीं हैं । घर के सबसे बड़े स्तंभ को सहेज कर रखें। एक दूसरे के लिए इज़्ज़त ज़िन्दगी की रेसिपी का जरूरी अवयव है।