मे और मेरे अह्सास
गाँव उजड़ लग रहा है l
शहर खाली खाली l
रास्ते गुमसुम है l
हर कही सन्नाटा छाया है l
सिर्फ खालीपन का शोर है l
अपनी ही करनी का फल है l
जो आज तू घर में कैद है l
सभी को खुला आसमाँ चाहिए l
ये बात आज तुजे पता लगेगी l
अभी भी वक़्त है, तू जी ले अपनी जिंदगी l
औरों को भी जीने दे खुलकर उनकी जिंदगी ll
दर्शिता.