सर्दियों की ठंडी हवाओं में,
गर्मियों की लू है वो।
अपनी ख़्वाहिशों को छुपाकर,
हमारी इच्छाएं पूरी करता है वो।
ज़िन्दगी के चढ़ती इमारत की,
नींव का सहारा है वो।
मृदुल हृदय के ऊपर,
चढ़ाया हुआ सख़्त चट्टान है वो
बिना कुछ बोले बहुत कुछ,
बतला जाता है वो,
दिन रात की, थकान भरी मेहनत से,
हमारा पेट भरता है वो
प्रभु की आराधना करने वाले...
मेरे जीवन मे प्रभु से कम नही है वो
हमारा हाथ छोड़कर भी,
हमे ही चलना सिखाते है वो।
मुख से कुछ निरस्त किये बिना,
न जाने कितने दर्द सह जाता है वो।
अंधेरो में छिन्द्रों से निकली,
रोशनी के समान है वो।
कड़ी धूप में सुकून देने वाली,
ठंडी हवाएं है वो।
दिल को सुकून मिलता है,
जब प्यार बाबू बुलाते है वो।
दुखो से भरे कोने में भी,
सबसे पहले नज़र आते है वो।
माता पिता है जीवन का सितारा,
पत्नी के सिन्दूर का सहारा,
बेटे के सफलता की पूंजी,
बेटी के अस्तित्व की कूंजी में है वो
उथल पुथल वाली ज़िन्दगी में भी,
शांति से चलता जाता है वो
ऑफिस से आने के बाद,
बच्चों के, " कुछ खाने के लिए लाना "
खुशी में है वो
हमारे परिवार की कश्ती को चलाने वाले
ऐसे.....
मेरे पिता है वो
मेरे पिता है वो