सागर तट पर बैठे तन्हा सुकून से
यादृच्छित लहरों को देखूँ चैन से
हवा में रंग बिरंगी तितलियों का
ऊपर आसमान में बादलों का
यादृक्छिक बन मौज से यूँ लहराना
बीच बीच में बिजली का कौंध जाना
सब मन को कितना भाता है
क़यामत तक यहीं बैठी रहती मैं
मन की आज यही अभिलाषा है
#यादृच्छिक