मे और मेरे अह्सास
बहोत ऊंची उड़ान भर रहा था l
बड़ी लम्बी दोड़ लगाई थी l
ना जाने कहां जाना चाहता था l
ना जाने क्या पाना चाहता था l
जाने क्या लगन दिमाग में हामी थी l
खुद को भुला गया था l
खुद के लिए जीना भूल गया था l
खुदा ने बस धीरे से एक फूंक मारी l
पिजरे मे कैद हो गया अकक्ल ठिकाने आ गयी l
खुद को तीसमार समझने वाला l
एक ही पल मे खुद के पास जाके बैठ गया ll
दर्शिता.