लोग बार बार कहते हैं यही
मेरा यादृक्षिक स्वाभाव सही नहीं
मैं गलत हूँ या सही मुझे पता नहीं
पर मैं अपने मन की जरूर करती हूँ
किसी का बुरा न सोचती न करती हूँ
हाँ जो मन आया लिखती पढ़ती हूँ
जहाँ मन किया वहां घूम लेती हूँ
मैं फक्क्ड़ घुमक्क्ड़ जरूर हूँ
फिर भी जरूरतमंदों को
दो पैसे जरूर देती हूँ
हाँ सब को खुश रखने की
कला नहीं है मुझ में
सही गलत का ज्ञान है मुझे
पर लोग मुझे नहीं समझते
#यादृच्छिक