ये कैसा आलम है आज
बदले से हैं सब के अंदाज
भूल गए मिलना जुलना आज
आज फेसबुक ट्वीटर हैं
इन पर शेयर कर रहे हैं
स्काइप और व्हाट्सप्प करते हैं
या फिर ब्लॉग या इंस्टा पे रहते हैं
करते अपने अफ़साने ज़ाहिर
इस हुनर में हैं हम सब माहिर
अब वो आमने सामने बैठना
चाय की चुस्की और फली खाना
हँसते हंसाते लोटपोट होना
सुख दुःख में शामिल होना
कितना बदल गया है ज़माना
किस गलतफहमी में जी रहे हैं
इस तरक्की से खुश हो रहे हैं
#जाहीर
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